Saturday, April 8, 2017

क्या करे आदमी?
जब...
सुबह के चार बजे,
न रोना आता है,  
न सोना आता है। 
आती है बहुत तेज़,
पेशाब,
जिसे रोक कर वो कुछ लिखता रहता है,
और करता है , ख़ुद से बातें,
पर कुछ सुन नहीं पाता,
तो सारी lights बुझा कर,
बिस्तर पर जा कर बैठ जाता है,
कुछ देर,
फिर बाहर बैठता है, hall में,
कुछ देर,
फिर kitchen में,
कुछ देर,
फिर toilet की seat  पे 
कुछ देर,
फिर दिल बैठ जाता है। 

-प्रणव मिश्र 


No comments:

Post a Comment