Sunday, April 30, 2017

जब.. कई दिनों तक,
पेट ख़राब हो,... तो
टट्टी करने में मज़ा नहीं आता,
पेट पकड़ कर कितनी ही देर बैठते हैं हम, pot पे,
टट्टी आती नहीं,
पर... आंतें दर्द ज़रूर करती हैं,
कई cases में पेट भी ठीक हो जाता है,
और टट्टी भी आती है,
पर आंतें इतना सूज जाती हैं तक़लीफ़ में,
कि मज़ा नहीं आता।
ठीक इसी तरह लगता है,
३२ सालों तक किसी न किसी के बार-बार आने,
और बार-बार जाने के बाद,
धड़कनें सूज जाती हैं,
और फेफड़ों में fit नहीं होतीं,
बड़ी ज़ोर से खटखटाती रहती हैं,
सीने के पीछे से रात भर,
पर निकल नहीं पातीं, तो...
आदमी जो न पीता है, न फूंकता है,
कुछ देर को meditative music लगाता है,
फिर नींद तो आ जाती है,
पर मज़ा बिलकुल नहीं आता।


-प्रणव मिश्र 

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